📍 हरसिद्धि मंदिर परिसर
मंदिर का परिचय
यह मंदिर उज्जैन के प्रसिद्ध हरसिद्धि मंदिर परिसर में स्थित है और "84 महादेव" श्रृंखला का दसवाँ मंदिर माना जाता है। आंतरिक रूप से प्रसन्न और भक्तिभाव से युक्त यह स्थल तीर्थयात्रियों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
पौराणिक कथा
एक कथा के अनुसार, सर्पों की माता ने अपने पुत्रों को श्राप दिया कि वे जनमेजय यज्ञ में जलकर भस्म हो जाएंगे। अपनी रक्षा हेतु कर्कोटक नामक सर्प ने ब्रह्मा से सलाह ली, परंतु ब्रह्मा ने उन्हें महाकाल वन जाकर पवित्र शिवलिंग की पूजा करने की प्रेरणा दी। वहां कर्कोटक ने तपपूर्वक शिवलिंग आराधना की। प्रसन्न होकर भगवान शिव ने आशीर्वाद दिया कि जो नाग धर्म का आचरण करेंगे, उनका विनाश नहीं होगा—तब से यह लिंग कर्कोटेश्वर महादेव के नाम से जाना जाने लगा।
महत्व
एक कथा के अनुसार, सर्पों की माता ने अपने पुत्रों को श्राप दिया कि वे जनमेजय यज्ञ में जलकर भस्म हो जाएंगे। अपनी रक्षा हेतु कर्कोटक नामक सर्प ने ब्रह्मा से सलाह ली, परंतु ब्रह्मा ने उन्हें महाकाल वन जाकर पवित्र शिवलिंग की पूजा करने की प्रेरणा दी। वहां कर्कोटक ने तपपूर्वक शिवलिंग आराधना की। प्रसन्न होकर भगवान शिव ने आशीर्वाद दिया कि जो नाग धर्म का आचरण करेंगे, उनका विनाश नहीं होगा—तब से यह लिंग कर्कोटेश्वर महादेव के नाम से जाना जाने लगा।
आस्था और दर्शन
हरसिद्धि मंदिर दर्शन के दौरान कई श्रद्धालु कर्कोटेश्वर महादेव का पूजन और दर्शन भी अवश्य करते हैं। यह मंदिर भक्तों के लिए आध्यात्मिक एवं परमानंदकारी अनुभव प्रदान करता है।
विशेष जानकारी
यह "84 महादेव" श्रृंखला का दसवाँ मंदिर (10/84) है।
यह उज्जैन के धार्मिक पर्यटन में एक आत्मिक केंद्र है, जहां भक्तों का प्रतीकात्मक रक्षा से जुड़ा अनुभव होता है।
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